➤ दो साल का निरंतर अनुबंध सेवाकाल पूरा करने पर शिक्षक नियमितीकरण के हकदार
➤ प्रशासनिक देरी और आचार संहिता को नियमितीकरण रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता
➤ एक अप्रैल 2024 से नियमित कर एरियर समेत सभी वित्तीय लाभ छह सप्ताह में देने के निर्देश
अनुबंध शिक्षकों के हक में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दो साल पूरे होते ही मिलेगा नियमितीकरण का अधिकार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत अनुबंध शिक्षकों (लेक्चरर स्कूल-न्यू) के नियमितीकरण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली देरी या चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर किसी कर्मचारी को उसके मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी शिक्षक ने दो वर्ष का निरंतर अनुबंध सेवाकाल पूरा कर लिया है और उसकी नियुक्ति निर्धारित नियमों के तहत स्वीकृत पद पर हुई है, तो वह उसी तारीख से नियमितीकरण का हकदार बन जाता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब कर्मचारी का चयन वैधानिक नियमों के तहत हुआ हो और उसका कार्य-प्रदर्शन संतोषजनक रहा हो, तो नियमितीकरण में अनावश्यक देरी करना उसके संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।
प्रशासनिक देरी से शिक्षक के अधिकार नहीं रोके जा सकते
खंडपीठ ने अपने फैसले में साफ कहा कि नियमितीकरण की प्रक्रिया में प्रशासनिक देरी का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना पड़ सकता। इसी तरह चुनाव आचार संहिता को भी नियमितीकरण में देरी का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अदालत के अनुसार, कर्मचारी जब निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर लेता है तो उसका अधिकार उसी समय पैदा हो जाता है। बाद में प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने में लगने वाला समय उस अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकता।
इसका सीधा असर उन अनुबंध शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्होंने निर्धारित अवधि पूरी कर ली थी लेकिन किसी कारण से उन्हें समय पर नियमित नहीं किया गया।
एक अप्रैल 2024 से नियमित करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकारियों को याचिकाकर्ताओं को 31 मार्च 2024 तक दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद एक अप्रैल 2024 से नियमित करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने यह भी कहा है कि शिक्षकों को नियमितीकरण की प्रभावी तारीख से मिलने वाले सभी वित्तीय लाभ उपलब्ध करवाए जाएं। इनमें एरियर, नियमित वेतनमान, वार्षिक वेतन वृद्धि और वरिष्ठता संबंधी लाभ शामिल हैं।
राज्य प्राधिकारियों को इन सभी वित्तीय लाभों का भुगतान छह सप्ताह के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश से उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें निर्धारित अवधि पूरी करने के बावजूद नियमितीकरण का लाभ समय पर नहीं मिल पाया था।
नियमितीकरण नीति का क्लाउज नौ भी अमान्य
हाईकोर्ट ने नियमितीकरण नीति के क्लाउज नौ को भी याचिकाकर्ताओं के मामले में अमान्य और अप्रभावी करार दिया है।
पीठ ने इस प्रावधान पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सरकार को कर्मचारियों को नियमित करने के मामले में मनमाने ढंग से और असीमित विवेकाधिकार का अवसर देता है।
अदालत ने माना कि इस तरह की व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता और समान अवसर के अधिकार के अनुरूप नहीं है।
अदालत का संदेश स्पष्ट है कि निर्धारित नियमों के तहत पात्रता पूरी करने वाले कर्मचारियों के नियमितीकरण को सरकार की अनिश्चित या मनमानी इच्छा पर निर्भर नहीं रखा जा सकता।
2019 में चयन, 2021 में हुई थी नियुक्ति
मामले में याचिकाकर्ता मोहिंद्र और अन्य वर्ष 2019 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें नवंबर-दिसंबर 2021 में लेक्चरर स्कूल-न्यू के पद पर अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया।
याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति स्वीकृत पदों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई थी। उन्होंने लगातार अपनी सेवाएं दीं और उनके कार्य-प्रदर्शन को लेकर कोई प्रतिकूल स्थिति सामने नहीं रखी गई।
प्रदेश सरकार ने 2 दिसंबर 2023 को नियमितीकरण से संबंधित नीति जारी की थी। इस नीति के तहत 31 मार्च 2024 तक दो वर्ष का निरंतर अनुबंध सेवाकाल पूरा करने वाले कर्मचारियों को नियमित किए जाने का प्रावधान था।
नवंबर-दिसंबर 2023 में ही पूरा हो गया था दो साल का सेवाकाल
याचिकाकर्ताओं के अनुसार उन्होंने नवंबर-दिसंबर 2023 में ही अपनी दो वर्ष की अनुबंध सेवा पूरी कर ली थी। इस आधार पर वे नीति के अनुसार एक अप्रैल 2024 से नियमितीकरण के पात्र हो गए थे।
इसके बावजूद उन्हें समय पर नियमित नहीं किया गया। इसी देरी को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने मामले की परिस्थितियों और लागू नीति पर विचार करने के बाद माना कि पात्रता पूरी करने के बाद नियमितीकरण में हुई प्रशासनिक देरी से शिक्षकों के अधिकार प्रभावित नहीं किए जा सकते।
नियमित वेतनमान और वरिष्ठता का भी मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट के फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि नियमितीकरण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। अदालत ने संबंधित शिक्षकों को उनकी पात्र तारीख से वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
इसमें नियमित वेतनमान के साथ वार्षिक वेतन वृद्धि और वरिष्ठता का लाभ भी शामिल है। इसके अलावा नियमितीकरण की प्रभावी तारीख से बनने वाला एरियर भी शिक्षकों को दिया जाना है।
इस फैसले से अनुबंध आधार पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए यह संदेश गया है कि निर्धारित नियमों के तहत पात्रता पूरी करने के बाद प्रशासनिक स्तर की देरी उनके अधिकारों को खत्म नहीं कर सकती।



